कोरोना वायरस, चायनीज वायरस है या अमेरिकी वायरस

आज हम सभी जानते है की COVID19 के महामारी कर कारण पूरी दुनिया परेशान है और यह बीमारी लगभग दुनिया के 190 से अधिक देशों में फ़ैल चूका है और इसके दुष्प्रभाव अब सामने है और पूरी दुनिया अपने घरों में है खासकर भारत में 40 दिनों का LOCKDOWN चल रहा है। जहाँ पूरी दुनिया में इसके मरीजों की संख्या 25 लाख से अधिक हो चुकी है तो मृतकों की संख्या 180000 के करीब है। भारत में कुल मरीज 20000 के ऊपर है और लगभग 650 लोगों  की मृत्यु  हो चुकी है।

To attack on journalist is not the murder of democracy? Media is the 4th step of democracy.https://currentwa.blogspot.com/2020/04/blog-post_22.html




these pics taken from google image, Using only for blog purpo


आजकल अमेरिका से लेकर  पूरी दुनिया चीन की 64साल  पुरानी वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी Lab  को कोरोना वायरस फैलाने के लिए  जिम्मेदा मान  रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प कोरोना को चीनी वायरस कह कर पुकारते हैं,  मगर सच ये है कि चमगादड़ पर रिसर्च करने के लिए अमेरिका वुहान के उसी लैब को पिछले पांच सालों से फंड दे रहा है,  जिस लैब से वायरस लिक होने की बात कहीं जा रही है। 2015 से अब तक अमेरिका वुहान के लैब को 37 लाख डॉलर यानि लगभग 28 करोड़ फंड दे चुका है। 2014 तक कोरोना पर रिसर्च करना चाहता था लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे अमेरिका के बाहर वुहान लैब में कराने का फैसला किया गया ज़ब वहाँ के राष्ट्रपति बराक ओबामा थे।
अमेरिका के एक डॉक्टर एंथनी फाउची है. वह पिछले 36 सालों से अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिसीज यानी NIAID के डॉयरेक्टर हैं. जॉर्ज बुश, रोनल्ड रीगन, बिल क्लिंटन, बराक ओबामा और अब डोनल्ड ट्रंप समेत पांच-पांच अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ काम कर चुके है। और आजकल उनके संरक्षण में Covid19 के खिलाफ लड़ा जा रहा है।

these pics taken from google image

अब हैरान करने वाली बात ये है की डाक्टर एंथनी फाउची ने ये बात सवा तीन साल पहले जनवरी 2017 में ज़ब ट्रम्प प्रेसिडेंट बनने जा रहे थे तभी बता दिया था कि अमेरिका की नई सरकार यानी ट्रंप सरकार  में एक भयानक संक्रामक बीमारी आएगी जो अब COVID19 के रूप में दुनिया के सामने हैं।
डॉक्टर एंथनी फाउची ने 2017 में ही इस महामारी की भविष्यवाणी कर दी थी। इन्हीं की सिफारिश पर 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने वुहान वायरोलजी लैब को 37 लाख डॉलर का फंड दिया था। यह फंड SARS VIRUS और चमगादड़ पर रिसर्च के लिए था और ये फंड ट्रंप के कार्यकाल में भी जारी रहा.
चीन की वुहान लैब को अमेरिका के जिस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ यानी NIH से फंडिंग मिल रही है, वो बॉयोमेडिकल और पब्लिक हेल्थ रिसर्च को करने वाला अमेरिका का सरकारी संस्थान है और उसका नाम वुहान के लैब की वेबसाइट पर एक पार्टनर के रूप में है। हालांकि खुलासा होने के बाद ट्रंपप्रशाशन ने इस पर रोक लगा दी है।

Information Taken From :- Different Sources
our motto is aware to you
thanks all readers

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Kya lenin ka statue, amar jawan memorial se jyada important hai?

BJP Government 2.0 : 5 Major Achievement for NDA

कांग्रेस यूथ ने अर्णब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर किया हमला: लोकतंत्र की हत्या